ज्यादातर हम सभी यूट्यूब पर फेसबुक पर अपना समय पास करते हैं साथ-साथ टेलीग्राम इंस्टाग्राम पर भी टाइम पास करते हैं और हर दिन ना जाने कितने ऑनलाइन आवेदन किए जाते हैं अक्सर आपने नोटिस किया होगा जब कोई सरकारी नौकरी का फॉर्म रिलीज होता है और उस समय जब आप ऑनलाइन करने जाते हैं तो आपका ऑनलाइन आवेदन होता तो है लेकिन उसमें बहुत समय लगता है उसके बाद में ऑनलाइन करता आपको कहता है कि भैया सरोवर बहुत स्लो है आवेदन होने में टाइम लगेगा ऐसे में एक सवाल आता है की आखिरी यह सर और होता क्या है और यह कैसे बिजी या फिर स्लो हो जाता है आज के इस पोस्ट में हम आपको सरवर के बारे में बताएंगे साथ-साथ बताएंगे कि सरवर क्या होता है यह कैसे काम करता है सर्विस स्लो कब रहता है सर्वर फास्ट कर रहता है और सर्वर कैसे बनाया जाता है इन सारी बातों पर हम आज की इस पोस्ट में चर्चा करेंगे तो पोस्ट को पूरा पढ़ना हो सकता है आपको 15 20 मिनट लग जाए लेकिन इस पोर्ट से आपको जो जानकारी मिलेगी वह जानकारी शायद ही आपको यूट्यूब पर मिले तो चलिए समय को बिना बर्बाद किया सरवर के बारे में अच्छी तरह से समझते हैं
Introduction
दोस्तों हमेशा की तरह किसी भी पोस्ट की शुरुआत इंट्रोडक्शन से होती है मतलब कि हम उसके बारे में थोड़ा बहुत समझे बेसिक बातें समझ तो सबसे पहले हम यह समझते हैं सरोवर क्या होता है सर्वर कोई बहुत बड़ी हस्ती नहीं है वह हमारे कंप्यूटर की तरह ही होता है लेकिन कंप्यूटर बहुत छोटा होता है सर और बहुत बड़ा होता है कंप्यूटर को हम कहीं पर भी आसानी से लेकर आ जा सकते हैं लेकिन सरसों के साथ ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि एक सरवर के अंदर हजारों मेमोरी कार्ड लगे रहते हैं
अब हम सरवर के बारे में धीरे-धीरे अच्छी तरह समझते हैं कि सरोवर क्या होता है वह कैसे काम करता है
#सर्वर क्या होता है
दोस्तों सर्वर एक कंप्यूटर ही है बस फर्क इतना है कंप्यूटर को हम कहीं पर भी लेकर आ जा सकते हैं लेकिन सरोद के साथ हमेशा नहीं कर सकते क्योंकि सारों में कोई एक दो कंप्यूटर नहीं होते स्वरों में हजारों कंप्यूटर होते हैं लाखों टेराबाइट के मेमोरी कार्ड होते हैं बहुत सारे इलेक्ट्रिक कनेक्शन होते हैं जिससे सर्वर अच्छी तरह से संचालित होता है हर सर्वर का एक आईपी एड्रेस होता है जिससे उसे सरवर की पुष्टि की जाती है सरवर कोई एक दो रूम जितना बड़ा नहीं होता बल्कि सर्वर इतना बड़ा होता है जितने में हम 50 से भी जादा रूम बना सकते हैं यह इस पर निर्भर करता है कि हम सरवर को कितना बड़ा बनना चाहते हैं गूगल का फेसबुक का सर्वर बहुत बड़ा है जितना कि आप इसका आकलन नहीं कर सकते इतना बड़ा है क्योंकि गूगल का सर्वर और फेसबुक इंस्टाग्राम व्हाट्सएप इन सभी की सर्वर पर हर दिन करोड़ यूजर एप्लीकेशन उसे करते हैं ऐसे में अगर सर्वर छोटा-मोटा रहता है तो सरोवर स्लो हो सकता है या फिर धीमा हो सकता है
#सर्वर कैसे बनाया जाता है
अब हम इस बात को समझते हैं सरवर कैसे बनाया जाता है दोस्तों सर्व बनाने के लिए सबसे पहले हमें लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के मदरबोर्ड की जरूरत पड़ती है जैसा कि मैं अभी आपको बताया एक सर्वर में हजारों में हजारों कंप्यूटर होते हैं और यह कंप्यूटर एक मदरबोर्ड से जुड़े रहते हैं दोस्तों सरोवर में जो कंप्यूटर लगे रहते हैं वह कोई आम कंप्यूटर नहीं होते हैं जैसा कि हम सभी उसे करते हैं उसे कंप्यूटर में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के SSD Drive लगे रहते हैं जिस तरह से हमारे फोन या फिर लैपटॉप में 8GB रैम होता है 16GB रैम होता है 12gb रैम होता है ठीक उसी प्रकार सर्वर में भी रैम होता है सरवर में जितना ज्यादा रैम होगा सर और उतना ही फास्ट होगा
हो सकता है आपके मन में एक सवाल आए सरवर में रैम की जरूरत क्यों पड़ती है स्टोरेज की जरूरत पड़ती है यह तो हम सभी मानते हैं क्योंकि सारों में लाखों यूजर का डाटा होता है लेकिन रैम की जरूरत क्यों पड़ती है तो चलिए इस बात को अच्छी तरह से समझते हैं दोस्तों जब आप अपने मोबाइल में या फिर कंप्यूटर में काम करते हो तो आपने नोटिस किया हुआ कि जब आप काम करते हो जैसे वीडियो देखते हो या फिर वीडियो एडिटिंग करते हो या वीडियो गेम खेलते हो तब आपका फोन का रैम बढ़ जाता है जैसे मान लो आपके फोन का राम 8GB है और अपने फ्री फायर गेम खेलना शुरू किया मान लो की फ्री फायर खेलने से पहले आपका फोन का रैम 3GB था और जब आपने फ्री फायर खेलना शुरू किया तो आपके फोन का रैम 4GB हो गया मतलब कि आपका फोन का टोटल रैम 8GB है जिसमें से 3 gb रैम सिस्टम ऐप में उसे किया और 1GB रैम फ्री फायर नहीं उसे किया तो इस तरह से टोटल 4GB रैम उसे हुआ ठीक उसी प्रकार एक सर्वर पर बहुत सारा डाटा आता है और जाता है हर सेकंड की बात है ऐसे में सर्वर में ज्यादा रैम का होना जरूरी है एक छोटे से उदाहरण से और मैं आपको समझता हूं जैसे मान लो आप अपने कंप्यूटर से अपने मोबाइल में कोई मूवी ट्रांसफर कर रहे हो और आप डाटा केबल का उसे कर रहे हो उसे समय जब आपके कंप्यूटर से आपके मोबाइल में मूवी ट्रांसफर हो रहा होगा तो उसमें प्रोसेसर भी तेजी से रन करेगा और रैम भी उसे होगा ताकि आपका कंप्यूटर यह चेक कर सके कि हमने मोबाइल फोन में कितना डाटा ट्रांसफर किया है और कितना डाटा बाकी है मतलब की बचा हुआ है ठीक उसी प्रकार सरर में भी होता है जब हम कोई वीडियो देख रहे होते हैं तो सरवर को उसका पूरा डिटेल रखना पड़ता है जैसे वीडियो की लंबाई कितनी है यूज़र ने कितने मिनट वीडियो देखा है कितना मिनट बाकी है यह सारा डाटा सर्वर पर से होता है इसके लिए रैम और प्रोसेसर हाई क्वालिटी के होना जरूरी है अब तो आप अच्छी तरह से समझ गए हैं सरोवर में रैम होना कितना जरूरी होता है
#स्टोरेज
दोस्तों किसी भी सर्वर में सबसे ज्यादा महत्व होता है स्टोरेज का क्योंकि अगर हम कोई मूवी देख रहे हैं अपने दोस्तों से चैटिंग कर रहे हैं या कोई भी ऑनलाइन कम कर रहे हैं तो सारा डाटा स्टोरेज में से होता है इसलिए सर्वर में लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के स्टोरेज होना जरूरी होता है साथ-साथ उसे डाटा का रीड एंड राइट स्पीड भी फास्ट होना चाहिए तभी एक सर्वर अच्छा परफॉर्मेंस देता है दोस्तों सर्वर बनाने के लिए टेराबाइट में स्टोरेज कार्ड उसे होता है जैसे मान लीजिए आप अपने दोस्त से व्हाट्सएप पर चैटिंग कर रहे हैं या फिर वॉइस मैसेज के जरिए चैटिंग कर रहे हैं तो ऐसे में सर्वर में बहुत ही ज्यादा स्टोरेज की जरूरत होती है क्योंकि एक समय में लाखों यूजर व्हाट्सएप को उसे करते हैं और आप तो यह बात अच्छी तरह से जानते हो यूट्यूब पर 1 दिन में कितने यूजर एक्टिव रहते हैं कितने लोग वीडियो को अपलोड करते हैं कितने लोग वीडियो को डाउनलोड करते हैं ऐसे में सर्वर में स्टोरेज का भी बहुत बड़ा रोल होता है क्योंकि जितना भी डाटा होता है सब स्टोरेज में ही से होता है यहां तक कि हम सब अपने दोस्तों से जो कुछ बातें कर रहे होते हैं रियल टाइम में जो बातें कर रहे होते हैं वह सब भी स्टोरेज में ही से होता है
#Optical Fibre
ऑप्टिकल फाइबर का तो नाम आपने जरूर सुना होगा दोस्तों हम सब जो कुछ भी इंटरनेट उसे करते हैं जितना भी डाटा होता है वह सब ऑप्टिकल फाइबर के जरिए ट्रांसफर होता है अब इसको मैं बहुत अच्छी तरह से आपको समझता हूं जैसे मान लो यूट्यूब का सर्वर अमेरिका में है लेकिन हम सब अपने भारत में यूट्यूब का मजा ले रहे हैं तो ऐसे में एक प्रश्न बनता है कि अमेरिका से युटुब का सर्वर हमारे पास कैसे आया तो दोस्तों इसके लिए न ऑप्टिकल फाइबर उसे किया जाता है हो सकता है आपके मन में एक सवाल आए हम सैटेलाइट बनाकर भी तो सरवर को आपस में कलेक्ट कर सकते हैं बट ऐसा नहीं है एक सर्वर पर लाखों यूजर हमेशा एक्टिव रहते हैं लाखों क्या करोड़ों में मुझे एक्टिव रहते हैं ऐसे में 1 से 10 लाइट के लिए सारे डेटा को हैंडल करना मुश्किल होता है इसलिए ऑप्टिकल फाइबर का उसे किया जाता है ऑप्टिकल फाइबर साधारण तरह के तार ही होते हैं लेकिन यह इन सभी तारों से अलग होते हैं इनको सबसे पहले सर्वर से कनेक्ट किया जाता है या फिर जोड़ा जाता है आप जो भी समझे उसके बाद समुद्र के रास्ते इसको हर देश से जोड़ा जाता है उसके बारे में टेलीकॉम कंपनी जिसको हम सिम कंपनी भी बोलते हैं जैसे हमारे भारत के कुछ पॉपुलर टेलीकॉम कंपनी जैसे Jio हो गया वोडाफोन एयरटेल BSNL हमारे भारतीय टेलीकॉम कंपनी है अब यह उसे सर्वर से ऑप्टिकल फाइबर को कनेक्ट करती हैं मतलब की जो सरवर का ऑप्टिकल फाइबर है उसे अपने ऑप्टिकल फाइबर को कनेक्ट करती है जोड़ती है उसके बाद में अपनी कंपनी का सेटेलाइट बनवेट हैं और उसे अंतरिक्ष में डाल देते हैं और उसके बाद में अपने हेड से जहां पर इन टेलीकॉम कंपनी का में मुख्यालय होता है वहां से सेटेलाइट को कनेक्ट किया जाता है
#मोबाइल टावर
दोस्तों जब सैटेलाइट को टेलीकॉम कंपनी के मुख्यालय से जोड़ा जाता है उसके बाद में उस सैटेलाइट को अच्छी तरह से काम करने के लिए अंतरिक्ष में छोड़ दिया जाता है उसके बाद में आता है नंबर मोबाइल टावर का क्योंकि दोस्तों आप अच्छी तरह से जानते हैं जब हम इंटरनेट उसे करते हैं तो हमारा फोन कई सारे सरवर से कनेक्ट हो जाता है लेकिन स्पीच हमारा फोन किसी भी प्रकार के तार से जुदा नहीं होता ऐसे में वायरलेस सिस्टम काम करता है हमारे फोन में वायरलेस सिस्टम बनाया जाता है साथ-साथ मोबाइल टावर में वायरलेस सिस्टम बनाया जाता है जो हमारे फोन को और मोबाइल टावर को वापस में कनेक्ट करता है जोड़ता है उसके बाद में सबसे जरूरी बात होता है कि हमारा मोबाइल मोबाइल टावर से कैसे कनेक्ट होगा उसके लिए हम सब सिम उसे करते हैं या फिर मोबाइल सिम इसे समझ सकते हैं यह हमारे मोबाइल को और मोबाइल टावर को वापस में कनेक्ट कर देता है
यह बातें कहानी तो आसान है लेकिन इस पर रिसर्च करने में पहचान को ने बहुत सारा समय लगाया है इस बात को हम भाषा में नहीं समझ सकते इसीलिए मैं आपको बेसिक चीज बता रहा हूं ताकि आपको समझ में आ जाए क्योंकि आपका दिमाग अभी उतना एडवांस नहीं हुआ है कि आप मोबाइल टावर सर्वर इन सब के बारे में एडवांस नॉलेज ले सके क्योंकि इसके लिए एक स्पेशल पढ़ाई होती है जिसमें लगभग डेढ़ से 2 साल लगते हैं उसके बाद में हम मोबाइल टावर और सर्वर पर अच्छी तरह से ज्ञान प्राप्त करते हैं
नोटिस
जब हमारा मोबाइल फोन पास के मोबाइल टावर से कनेक्ट होता है या फिर जोड़ता है जो आप समझे तब उसे समय वह मोबाइल टावर एक सेटेलाइट से जुड़ा रहता है जिसको कंपनी वालों ने लांच किया होता है जिनको हम टेलीकॉम कंपनी भी बोलते हैं और वह सैटेलाइट टेलीकॉम कंपनी के में ब्रांच से कनेक्ट होता है में ब्रांच में सभी कंपनियों के सरोवर के ऑप्टिकल फाइबर जुड़े रहते हैं और जितने भी ऑप्टिकल फाइबर होते हैं वह तमाम प्रकार के सर्वर से जुड़े रहते हैं सरोवर को चलाने के लिए बहुत ही ज्यादा इलेक्ट्रिक की भी जरूरत पड़ती है ताकि वहां पर जो कंप्यूटर कम कर रहे हैं उनको सुचारु रूप से काम करने के लिए कोई दिक्कत ना हो क्योंकि एक करोड़ में एक दो कंप्यूटर नहीं हजारों कंप्यूटर एक साथ काम कर रहे होते हैं दोस्तों आने वाले समय में मैं आपको वीडियो के माध्यम से 3D वीडियो के माध्यम से सर्वर क्या होता है कैसे काम करता है सब कुछ बताने वाला हूं फिलहाल मेरे पास ऐसा कोई अभी सेटअप नहीं है कि मैं आपको एक अच्छी जानकारी दे सकूं इसीलिए आपको मैं इस वेबसाइट के जरिए बता रहा हूं मुझे जानकर खुशी होगी कि अगर आपने यहां तक पढ़ा है तो यह मान लो कि अपने सरों के बारे में बहुत कुछ सीखा है बाकी अगर आपको सरवर के बारे में कुछ और भी जानना है तो मैं आपको जरूर बताऊंगा बस आपको आपका टॉपिक जो है उसको कमेंट में लिख देना है ताकि मैं आपकी दिक्कतों को या आपके प्रश्नों को पढ़ सकूं तो मुझे आशा है आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा मिलते हैं फिर किसी एक अच्छे से पोस्ट में तब तक के लिए हमारे इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें ताकि उन्हें भी पता चले कि सरोवर कैसे काम करता है यह तो एक बेसिक नॉलेज था