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स्व उपचार और सूर्य – ( सिर के बाल ) 


बाल हमारी ताकत को दर्शाते हैं ! जब बहुत अधिक तनाव होता है तो  बालों  को ऑक्सीजन नही मिलता तब बाल झड़ने लगते हैं  ! यदि तनाव लगातार बढता रहता है  तो  बाल उगने बंद हो जाते हैं ! नतीजा गंजापन होता है !


*  आज  महिलाएं  भी व्यापार और नौकरी या अन्य काम धंधे करने लगी हैं वे भी  तनाव तथा हताशा  झेल रही हैं,  उनमे भी गंजेपन की घटनाएँ बढ़ रही हैं ! महिलाओं में गंजेपन का पता   नहीं चल पाता क्योंकि उनके बाल  प्राय स्वभाविक होते हैं ! 


*तनाव से कमजोरी  आती है  ! शांत रहना ही वास्तव में, मजबूत तथा सुरक्षित होना है ! शरीर के लिये  आराम बहुत जरूरी है  ! शरीर को आराम तभी मिलेगा जब सिर में ठंडक अर्थात शांति होगी ! 


* इसलिये  अपनी खोपड़ी को  सहज रखना ही अच्छा होगा ! अपनी खोपड़ी को सहज करने के लिये मन में शांति, प्रेम, दया के संकल्प रखें ! यदि आपको लगे कि सचमुच अपनी खोपड़ी को आराम मिला है तो इस अभ्यास को बार बार करें 

*साधारण बीमारियां तो शीघ्र दूर हो जाती हैं परन्तु गम्भीर बीमारियों के लिए समय चाहिए और नित्य प्रति ध्यान से चिकित्सा देनी चाहिए ! तभी रोगी लाभ प्राप्त कर सकता है ! 


*मनुष्य के लिए मन से बड़ी कोई चीज नहीं है ! मन के हारे हार है, मन के जीते जीत है ! मन से असाध्य बीमारियों का ईलाज किया जा सकता है ! मेडिकल साइंस मन को सर्वथा नजरंदाज करता है !  


*मन को केन्द्रित करने के लिए किसी कन्दरा या गुफा में जाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि मन को एक साधारण व्यक्ति भी केन्द्रित कर सकता है ! मुख्य घटना मन ही है !  


*आत्मा, मन एवं शरीर तीनों का सयुंक्त रूप है जिसमें मुख्य आत्मा है- जो चेतन है ! 


*मन में सूर्य को या शिव बाबा को देखते हुए कहते रहें आप शांति के सागर हैं , शांति के सागर हैं ! आप के सभी असाध्य रोग ठीक हो जाएगे 1 रोग का उचित इलाज भी करते रहना है ! आप की हीलिंग बहुत तीव्रता से होगी !



* आँखे  मन की  डायरेक्ट कर्म इन्द्रिय है ! मन अर्थात आत्मा की डायरेक्ट इन्द्रिय है ! आत्मा पीनियल  ग्रंथि में   रहती है !


* पीनियल ग्रंथि में एक छोटा सा लोहे  का कण है ! यह कण  चुम्बक का कार्य करता है !  इस चुम्बक के द्वारा हमारी  आत्मा  पृथ्वी के उतरी  ध्रुव के माध्यम से सूर्य से जुड़ी हुई  है !


* हम कह सकते हैं कि हमारी आँखे सूर्य से डायरेक्ट जुड़ी हुई है ! 


* हमारे बारे कोई भी कुछ भी सोचता है वह संकल्प पहले सूर्य पर जाते हैं ! सूर्य से वह संकल्प हमारे सहस्त्रार चक्र  पर रिसीव होते हैं ! सहस्त्रार  चक्र से संकल्प पीनियल  ग्रंथि अर्थात  आत्मा में जाते हैं  ! आत्मा  से  हमारे  मन में को जाते   हैं  !  मन से आँखों में जाते हैं ! आँखों से हमारे मुख पर जाते हैं !  हमारा मुख  शरीर  की सभी कोशिकाओ और अंगो से जुड़ा है ! चेहरे से सभी सम्बंधित अंगो को और सूक्ष्म  ग्रंथियों   को जाता है और शरीर के अंग उसी अनुसार कार्य करने लगते हैं !


*-  दो  नवीन  पुस्तकें आन्तरिक बल भाग  -7    (मन  और सूर्य )  तथा  आंतरिक बल        भाग  -8  ( जल तत्व और मन ) -  छप चुकी हैं  !   आन्तरिक बल  भाग -1 से 6 भी    लेने  के लिए, अपना नाम, पोस्टल एड्रेस, मेरे  व्हाटसअप नम्बर 9896348516 पर लिख कर भेजें ! खर्च  मूल्य पर  डाकघर से पुस्तक /पुस्तकें  भेज  दूंगा !   आप   एक या सभी बुक्स ले सकते हैं! 


Milakh Raj  Sandha, Hisar, Haryana, India, 9896348516

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