जैसा कि हम सभी जानते हैं कैंसर एक बहुत ही घातक बीमारी है लेकिन आज हम इस पोस्ट में कुछ नया सीखने वाले हैं कैसे एक स्त्री ने कैंसर पर विजय पाई उसी के द्वारा जो बताया गया उसका अनुभव है उसी को हम इस पोस्ट के माध्यम से आपके साथ शेयर कर रहे हैं तो कृपया इस पोस्ट को जरूर पढ़ें ताकि आप भी कैंसर ना मत इस घातक हुआ जानलेवा बीमारी पर विजय प्राप्त कर सके
स्वामी विवेकानंद के गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी को गले का कैंसर था। व्याधि बलवान या साधना बलवान, इस युद्ध में रामकृष्ण परमहंस जी ने साधना बलवान यह विश्व को दिखा दिया। इसी प्रकार ब्रह्माकुमारी की प्रथम मुख्य प्रशस्तिका मातेश्वरीजी ने भी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का सामना किया। उन्होंने भी साधना ही सर्वश्रेष्ठ है, प्रत्यक्ष प्रमाण दिखाते हुए यहां सिद्ध किया। इन्हीं महान आत्माओं का आदर्श सामने रखते हुए कैंसर की बीमारी से दो हाथ करने वाली मुझ आत्मा का यह अनुभव सभी आत्माओं के लिए प्रेरणादाई होगा।
देखिए दोस्तों हम सभी के अंदर प्राण शक्ति रहती है जिसको हम आत्मा कहते हैं आत्मा अगर शरीर से निकल जाती है तो शरीर मृत्यु को प्राप्त हो जाता है तो इसीलिए कुछ समय के लिए हम खुद को शेयर ना मानते हुए आत्मा मान रहे हैं क्योंकि कष्ट तो शरीर को होता है लेकिन उसे दुख को आत्मा भी भोगते है
यह बात है ब्रह्माकुमारी संस्था के एक बहन की जिसका नाम कंचन है और जो थाने (मुंबई) में रहती हैं।
जून 2023 की बात है इस बहन की आयु 60 साल पूरी हो गई थी और फिर उन्होंने अपना संपूर्ण हेल्थ चेकअप कराने के लिए एक डॉक्टर के पास गई। रिपोर्ट में यह मिला कि इस बहन को कैंसर है जो की सीटी स्कैन से पता चला।
इस दौरान इस बहन को कई सारी दिखते हो रही थी जैसे भोजन करने में खुशी कम होना या भजन अच्छा न लगना भोजन का कड़वा लगा स्वाद विहीन लगाना इत्यादि।
जब इस बहन को भोजन कड़वा लगने लगा तो डॉक्टर ने सलाह दी कि यह पेट की स्कैन कराने को बोला। पेट स्कैन के दौरान डॉक्टरों ने इस बहन को कुछ दवाई दी जिसे पीनी थी। तो इस बहन ने सबसे पहले यह किया की दवाई को दवाई न मानकर उसे अमृत समझकर पिया परमपिता परमात्मा की याद में पिया ताकि जल्दी से जल्दी वह स्वस्थ हो सके।
अक्सर हम सभी को जब कोई गंभीर या बड़ी बीमारी होती है तो हम सभी घबरा जाते हैं और जो दवाई हमें डॉक्टर के द्वारा मिली है उन दावों को हम परमात्मा की याद में न रहकर बल्कि टेंशन में रहकर कहते हैं तो दवाई भी पूरी तरह से उसे बीमारी पर अपना प्रभाव नहीं डाल पाती यह एक साइकोलॉजी है लेकिन फिर भी इस बात को कोई नहीं समझ पाता।
यह बहन ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ी हुई है तो वहां पर मेडिटेशन और ध्यान पर बहुत फोकस किया जाता है और हमेशा यह बताया जाता है जब भी हम कोई दवा इस्तेमाल करें तो परमात्मा की याद में करें और हम यह मानकर उसे दवा का सेवन करें कि यह दावा दावा नहीं बल्कि हमारे लिए आरोग्य दाहिनी औषधि है
फिर कांचन बहन पेट स्कैनिंग के लिए गई और अपने मन में अच्छे-अच्छे विचार करने लगी। आप मानो या ना मानो लेकिन हमारे साथ जो कुछ भी हो रहा है वह ड्रामा में नोट है यानी आज हमारे साथ जो घटना घट रही है वह घटना हमारे साथ कई बार घट चुकी है इस जन्म में नहीं इससे पिछले जन्म में जब हम इस सृष्टि पर आए थे क्योंकि यह स्ट एक नहीं हजारों बार रिपीट हो चुकी है और रिपीट होती रहेगी।
इस बहन का कहना था जब पेट की स्कैनिंग हो रही थी तब वह अपने मन में संकल्प कर रही थी यह शरीर है और इसमें जंग लग गया है यह रिपेयरिंग होने के लिए हॉस्पिटल यानी गराज में आई है। जहां पर इसकी रिपेयरिंग होगी और फिर यह शरीर फिर से अच्छी तरह से स्वस्थ हो जाएगा जैसी एक पुरानी गाड़ी खराब होने के बाद में रिपेयर होती है तो फिर से सब कुछ सही हो जाता है। ऐसे ही विचार इस बहन के मन में चल रहे थे और पेट की स्कैनिंग कब खत्म हुई उसको पता ही नहीं चला और पेट की स्कैनिंग के दौरान मशीनों से निकलने वाले खतरनाक करने का इस बहन पर कोई असर नहीं हुआ।
कैंसर से तो डरना बिल्कुल नहीं
जो डॉक्टर इस बहन का इलाज कर रहा था उसका नाम डॉक्टर वूमेन डाबर है। उन्होंने सब कुछ चेक करने के बाद बताया कि फेफड़े और पेट में कैंसर चौथी स्टेज पर है। अगर किसी इंसान को कैंसर चौथी स्टेज पर हो जाए तो उसका बचना असंभव सा होता है लेकिन जिस पर स्वयं परमात्मा का आशीर्वाद और असीम अनुकंपा हो ऐसे लोगों का भयानक से भयानक बीमारी भी कुछ नहीं कर पाता।
जैसे ही घर वालों को पता चला की कैंसर चौथी स्टेज पर है तो सभी में सनसनी मच गई हर कोई टेंशन में हो गया क्योंकि अगर किसी को चौथी स्टेज का कैंसर हो जाता है तो उसका बचना असंभव होता है लेकिन इस बहन को जरा सी भी चिंता नहीं थी। वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च पे पाया कि अगर किसी को कोई भयानक बीमारी हो जाए और वह उसी के बारे में सोच व चिंता करें, तो बीमारी जल्दी ठीक नहीं होती यहां तक की रोजी की मृत्यु भी हो जाती है लेकिन अगर रोजी परेशान नहीं है उसे रोग से वह किसी भी प्रकार के टेंशन में नहीं है तो दवाइयां बहुत ही तेजी से उसे रोग को ठीक करती हैं। इस बहन के केस में भी कुछ ऐसा ही हुआ
जब सारी स्टेरिंग कंप्लीट हो गई और यह बहन बाहर आई तो वहां पर एक बोर्ड लगा था जिस पर लिखा था Together we fight like warrior जिसका मतलब होता है एक योद्धा की तरह हम इकट्ठे लड़ेंगे। इस बोर्ड को देखकर इस बहन के अंदर बहुत ही उत्साह आया इस बहन को टोटल दो जगह पर कैंसर था पहले पेट में था और दूसरा फेफड़ों में और दोनों ही कैंसर चौथी स्टेज पर थे तो आप समझ सकते हैं समस्या कितनी गंभीर थी।
लेकिन यह बहन इस बीमारी से जरा सा भी ना घबराई और परमपिता सी परमात्मा की याद में रहने लगी। इस बहन को ऐसा लगने लगा कि इसकी कोशिकाएं में स्वयं परमात्मा शक्ति भर रहे हैं ताकि वह कैंसर से लड़ सके।
जुलाई माह से इस बहन की पहली कीमोथेरेपी सुनिश्चित हुई कीमोथेरेपी का उसे कैंसर को ठीक करने में किया जाता है। इस बहन को ऐसा लग रहा था जैसे सभी डॉक्टर नर्स और स्टाफ मेंबर के साथ इसका पुराना रिश्ता हो साथ-साथ जब इस बहन का ट्रीटमेंट चल रहा था तो यह परमात्मा की याद में रहते थे और रोज मेडिटेशन करते थे और ब्रह्माकुमारी सेंटर पर नियमित रूप से जाया करती थी। इस तरह से बहन की धीरे-धीरे दिनचर्या नॉर्मल होती गई और कैंसर भी धीरे-धीरे ठीक होने लगा।
सबसे पहले कीमोथेरेपी और उसके बाद में मेडिसिन मेडिटेशन ध्यान योग परमात्मा की याद इन सभी ने मिलकर कैंसर को बहुत ही तेजी के साथ ठीक करना प्रारंभ कर दिया सबसे खास बात यह बहन कभी भी इस बारे में सूची भी नहीं कि मुझे कैंसर हुआ है फोर्थ स्टेज का। धीरे-धीरे करते पहले कीमोथेरेपी दूसरी कीमोथेरेपी तीसरी कीमोथेरेपी समाप्त हुई
आंतरिक शक्ति आने लगी
चौथी थेरेपी के बाद इस बहन को थकान महसूस होने लगी क्योंकि जब कीमोथेरेपी उसे किया जाता है तो शरीर में बहुत सी कोशिकाएं करने लगते हैं शरीर पर साइड इफेक्ट भी होने लगता है। इस दौरान डॉक्टर ने इस बहन को भीड़ में रहने से रोका था। मधुबन माउंट आबू में इस समय विशेष योग भट्टी का आयोजन किया गया था। योग भट्टी का मतलब होता है की 8 10000 लोग एक साथ मिलकर परमात्मा की याद में रहते हैं और उनसे योग लगते हैं। यह बहन भी इस योग भट्टी में चली गई और परमात्मा मिलन मनाया। और डॉक्टर को विश्वास दिलाया कि वह चिंता ना करें अपने चरित्र है हम वापस जरूर लौटेंगे।
पांचवी और छठी कीमोथेरेपी दीपावली के समय पर कंपलीट हुई और उसे समय जब फिर से जांच हुई तो डॉक्टरों ने पाया फेफड़े का कैंसर समाप्त हो गया था लेकिन अभी भी पेट में थोड़ा बहुत कैंसर का अंत था। इस बहन को बहुत ही खुशी हुई और डॉक्टर को भी बहुत ही हर्षोल्लाह हुआ कि इस बहन ने कैंसर पर विजय प्राप्त कर ली। एक कहावत आपने जरूर सुने होगी जाको राखे साइयां मार सके ना कोई कर सके जो जग बैरी होय।
इस समय यह बहन 99% स्वस्थ है और पिछले 30 सालों से ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ी हुई है। अगर आप भी चाहो तो आपको अपने आसपास किसी नजदीकी ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ सकते हैं और अपनी जीवन को खुशियों से कर सकते हैं बड़ी-बड़ी कठिनाइयों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं मैं तो आपको एक ही सलाह दूंगा आप इस संस्था से जरूर जुड़े
मिलते हैं फिर किसी एक अच्छे पोस्ट में तब तक के लिए धन्यवाद